समझदार केंकड़ा
जम्बो नगर की पहाड़ियों के बीच एक बहुत बड़ा सरोवर था। उस सरोवर में अनेकों तरह की छोटी बड़ी मछलियां थीं। उस में कुछ कछुए और केकड़े भी थे। केकड़ों का सरदार डेंगा बड़ा ही तेज और समझदार था। क्योंकि सरोवर में कोई पक्षी न होने के कारण मछलियां भयमुक्त थीं।
एक रोज की बात है कि सौरव नाम का बगुला वहां से उड़ता हुआ निकला। वह अपनी मौसी से मिलने जा रहा था। वह उड़ते उड़ते काफी थक चुका था। उसको प्यास लग रही थी। उसने इधर उधर नजर घुमाई तो उसे यह सरोवर दिखाई दिया तो उसने वहां रुक कर पानी पीने और कुछ देर सुस्ताने का विचार किया।
बगुले ने जम कर पानी पिया और जब वह सुस्ताने लगा तो उसकी नजर उन मछलियों पर पड़ी जो वहां कुलाचे मार रहीं थीं। उन्हें देख उसका मन ललचाने लगा। उसने सोचा कि अगर दो तीन मछलियां निगल लूं तो किसी को पता भी नहीं चलेगा। यह सोच कर उसने इधर उधर नजर घुमाई। जब उसे विश्वास हो गया कि उसे कोई देख नहीं रहा है तो उसने अपनी चोंच में धीरे से पानी में ऐसे डाली जैसे वह पानी पी रहा हो। उसके मुह में छोटी छोटी दो तीन मछली आ गईं। ऐसा स्वाद उसने आज तक नहीं चखा था। उसने मौसी के यहां जाने का इरादा त्याग दिया और कुछ दिन वहीँ बिताने का मन ही मन फैला लिया।
जब बगुला यह सब कर रहा था, वहीँ पास में एक बड़े से पत्थर के पीछे बैठा केकड़ा उसकी इस हरकत को देख रहा था। वह समझ गया कि यह कोई खतरनाक पक्षी है। मन में यह विचार आते ही वह मन ही मन घबराया, फिर कुछ सोच कर मछली रानी के पास पहुंचा।
केकड़े ने रानी को बताया कि ये जो नया पक्षी आया है वह बहुत खतरनाक लगता है। मैंने उसे कई छोटी मछलियों को चुपचाप खाते देखा है। अगर हमने इसे समय रहते भगाने की कोई जुगत नहीं लगाई तो यह सारी मछलियां चट कर जायेगा। यह सुनकर रानी बोली,' तो हम क्या करें। यह मुसीबत तो हम पहली बार देख रहें हैं।' दोनों ने कुछ देर मंत्रणा की फिर वे दोनों जगदल कछुए के पास पहुंचे। जब उसको बगुले के बारे में बताया तो वह भी हैरान हो गया।
कछुए ने उन्हे सलाह दी कि पहले तो मछलियों को उस ओर जाने से रोका जाएऔर केकड़ा इस पर बराबर नजर रखेगा।
रानी मछली ने सारी मछलियों की आपात मीटिंग बुलाई । उस मीटिंग में मछलियों को हिदायत दी गई कि कोई भी मछली किनारे की तरफ नहीं जाएगी। खासकर उस तरफ जिधर वह पक्षी खड़ा हो।
अपने आसपास मछलियां न देख कर बगुला परेशान हो गया। सारा दिन बीत गया, पर एक भी मछली उसके हाथ नहीं लगी तो उसने सरोवर में कुछ अंदर जाकर मछलियों का शिकार करने का मन बनाया। केकड़ा उसकी गतिविधि पर बराबर नजर बनाए हुए था।
जैसे ही बगुला ने आगे कदम बढ़ाया, केकड़ा उसके पैरों में लिपट गया। बगुला दर्द से कराह उठा और एक दम पीछे हट गया।
दूसरे दिन भी उसे अपने आसपास एक भी मछली नहीं दिखी। दो दिन से भूखा बगुला अधमरा हो गया।
तब मौका देख कर केकड़ा उसके सामने आया और बोला ,' लगता है तुम यहां के लिए नए हो? मैं भी यहां कुछ दिन पहले ही आया हूं। यहां की रानी मछली काफी घमंडी है । वह अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझती है। अगर हम दोनों मित्र बन जाएं तो इस सरोवर पर अपना दबदबा कायम कर सकते हैँ।'
बगुला मन ही मन ईश्वर को धन्यवाद देने लगा।
'मुझे तुम्हारा प्रस्ताव मंजूर है।' बगुला बोला।
'तो फिर मिलाओ हाथ अब से हम दोनों मित्र बन गए।' केकड़ा चिहुक कर बोला।
'मित्र यह तो बताओ सारी मछलियां अचानक गायब कहां हो गईं? कल से मेरे पेट में एक भी दाना नहीं गया है। भूख के मारे मेरी जान निकल रही है।'
'मित्र मैं समझ सकता हूं तुम्हारी पीड़ा। वे सब पास के सरोवर में सैर करने निकल गई हैं। अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हे उन तक ले जा सकता हूं । फिर वहां मजे से मछलियां खा कर अपना पेट भरना।
'तुम्हारे हिसाब से वह तालाब यहां से कितनी दूर होगा?' बगुले ने पूछा।
'यहीं पास में है।' केकड़े ने जबाव दिया।
केकड़ा बगुले की पीठ पर बैठ गया। बगुला उसके बतलाये रास्ते पर ले उड़ा। केकड़ा उसे कभी इधर तो कभी उधर घुमाता रहा। जब बगुले की हिम्मत जबाव देने लगी तो बगुला दुखी होकर बोला ,' तुम तो कह रहे थे कि सरोवर पास में ही है। घंटों हो गए मुझे इधर उधर घूमते, अब तो मेरी हिम्मत जबाव दे रही है। मुझे लगता है कि मैं यहीं गश खा कर गिर जाऊंगा। '
केकड़ा यही तो चाहता था। वह दुखी हो कर बोला ,' सरोवर था तो यहीं। ,लगता है हम रास्ता भटक गए हैं। ऐसा करो वापस चलो। मित्र अब तक तो वे वापस लौट भी गई होंगी।
बगुले की हिम्मत जबाव दे रही थी। वह बड़ी मुश्किल से सरोवर पंहुचा और पहुंचते ही बेहोश होकर लुढक गया। केकड़े को इसी मौके की तलाश थी। उसका इशारा पाते ही सारे केकड़े उस पर झपट पड़े और उसे नौच नौंच कर मार डाला। यह देख कर मछलियां ख़ुशी से उछलने लगीं। इस तरह केकड़े की सूझबूझ से वहां बगुले के रूप में आया संकट टल गया।
-विनोद हर्ष
जम्बो नगर की पहाड़ियों के बीच एक बहुत बड़ा सरोवर था। उस सरोवर में अनेकों तरह की छोटी बड़ी मछलियां थीं। उस में कुछ कछुए और केकड़े भी थे। केकड़ों का सरदार डेंगा बड़ा ही तेज और समझदार था। क्योंकि सरोवर में कोई पक्षी न होने के कारण मछलियां भयमुक्त थीं।
एक रोज की बात है कि सौरव नाम का बगुला वहां से उड़ता हुआ निकला। वह अपनी मौसी से मिलने जा रहा था। वह उड़ते उड़ते काफी थक चुका था। उसको प्यास लग रही थी। उसने इधर उधर नजर घुमाई तो उसे यह सरोवर दिखाई दिया तो उसने वहां रुक कर पानी पीने और कुछ देर सुस्ताने का विचार किया।
बगुले ने जम कर पानी पिया और जब वह सुस्ताने लगा तो उसकी नजर उन मछलियों पर पड़ी जो वहां कुलाचे मार रहीं थीं। उन्हें देख उसका मन ललचाने लगा। उसने सोचा कि अगर दो तीन मछलियां निगल लूं तो किसी को पता भी नहीं चलेगा। यह सोच कर उसने इधर उधर नजर घुमाई। जब उसे विश्वास हो गया कि उसे कोई देख नहीं रहा है तो उसने अपनी चोंच में धीरे से पानी में ऐसे डाली जैसे वह पानी पी रहा हो। उसके मुह में छोटी छोटी दो तीन मछली आ गईं। ऐसा स्वाद उसने आज तक नहीं चखा था। उसने मौसी के यहां जाने का इरादा त्याग दिया और कुछ दिन वहीँ बिताने का मन ही मन फैला लिया।
जब बगुला यह सब कर रहा था, वहीँ पास में एक बड़े से पत्थर के पीछे बैठा केकड़ा उसकी इस हरकत को देख रहा था। वह समझ गया कि यह कोई खतरनाक पक्षी है। मन में यह विचार आते ही वह मन ही मन घबराया, फिर कुछ सोच कर मछली रानी के पास पहुंचा।
केकड़े ने रानी को बताया कि ये जो नया पक्षी आया है वह बहुत खतरनाक लगता है। मैंने उसे कई छोटी मछलियों को चुपचाप खाते देखा है। अगर हमने इसे समय रहते भगाने की कोई जुगत नहीं लगाई तो यह सारी मछलियां चट कर जायेगा। यह सुनकर रानी बोली,' तो हम क्या करें। यह मुसीबत तो हम पहली बार देख रहें हैं।' दोनों ने कुछ देर मंत्रणा की फिर वे दोनों जगदल कछुए के पास पहुंचे। जब उसको बगुले के बारे में बताया तो वह भी हैरान हो गया।
कछुए ने उन्हे सलाह दी कि पहले तो मछलियों को उस ओर जाने से रोका जाएऔर केकड़ा इस पर बराबर नजर रखेगा।
रानी मछली ने सारी मछलियों की आपात मीटिंग बुलाई । उस मीटिंग में मछलियों को हिदायत दी गई कि कोई भी मछली किनारे की तरफ नहीं जाएगी। खासकर उस तरफ जिधर वह पक्षी खड़ा हो।
अपने आसपास मछलियां न देख कर बगुला परेशान हो गया। सारा दिन बीत गया, पर एक भी मछली उसके हाथ नहीं लगी तो उसने सरोवर में कुछ अंदर जाकर मछलियों का शिकार करने का मन बनाया। केकड़ा उसकी गतिविधि पर बराबर नजर बनाए हुए था।
जैसे ही बगुला ने आगे कदम बढ़ाया, केकड़ा उसके पैरों में लिपट गया। बगुला दर्द से कराह उठा और एक दम पीछे हट गया।
दूसरे दिन भी उसे अपने आसपास एक भी मछली नहीं दिखी। दो दिन से भूखा बगुला अधमरा हो गया।
तब मौका देख कर केकड़ा उसके सामने आया और बोला ,' लगता है तुम यहां के लिए नए हो? मैं भी यहां कुछ दिन पहले ही आया हूं। यहां की रानी मछली काफी घमंडी है । वह अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझती है। अगर हम दोनों मित्र बन जाएं तो इस सरोवर पर अपना दबदबा कायम कर सकते हैँ।'
बगुला मन ही मन ईश्वर को धन्यवाद देने लगा।
'मुझे तुम्हारा प्रस्ताव मंजूर है।' बगुला बोला।
'तो फिर मिलाओ हाथ अब से हम दोनों मित्र बन गए।' केकड़ा चिहुक कर बोला।
'मित्र यह तो बताओ सारी मछलियां अचानक गायब कहां हो गईं? कल से मेरे पेट में एक भी दाना नहीं गया है। भूख के मारे मेरी जान निकल रही है।'
'मित्र मैं समझ सकता हूं तुम्हारी पीड़ा। वे सब पास के सरोवर में सैर करने निकल गई हैं। अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हे उन तक ले जा सकता हूं । फिर वहां मजे से मछलियां खा कर अपना पेट भरना।
'तुम्हारे हिसाब से वह तालाब यहां से कितनी दूर होगा?' बगुले ने पूछा।
'यहीं पास में है।' केकड़े ने जबाव दिया।
केकड़ा बगुले की पीठ पर बैठ गया। बगुला उसके बतलाये रास्ते पर ले उड़ा। केकड़ा उसे कभी इधर तो कभी उधर घुमाता रहा। जब बगुले की हिम्मत जबाव देने लगी तो बगुला दुखी होकर बोला ,' तुम तो कह रहे थे कि सरोवर पास में ही है। घंटों हो गए मुझे इधर उधर घूमते, अब तो मेरी हिम्मत जबाव दे रही है। मुझे लगता है कि मैं यहीं गश खा कर गिर जाऊंगा। '
केकड़ा यही तो चाहता था। वह दुखी हो कर बोला ,' सरोवर था तो यहीं। ,लगता है हम रास्ता भटक गए हैं। ऐसा करो वापस चलो। मित्र अब तक तो वे वापस लौट भी गई होंगी।
बगुले की हिम्मत जबाव दे रही थी। वह बड़ी मुश्किल से सरोवर पंहुचा और पहुंचते ही बेहोश होकर लुढक गया। केकड़े को इसी मौके की तलाश थी। उसका इशारा पाते ही सारे केकड़े उस पर झपट पड़े और उसे नौच नौंच कर मार डाला। यह देख कर मछलियां ख़ुशी से उछलने लगीं। इस तरह केकड़े की सूझबूझ से वहां बगुले के रूप में आया संकट टल गया।
-विनोद हर्ष
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