Tuesday, 2 August 2016

Children story : Sher Ki Mousi

                                                                 
                                                                          शेर की मौसी

एक शहर में एक बिल्ली रहती थी। वह जिस घर  में घुसती वहीं पर उसे गालियां मिलतीं।  आखिर में तंग आकर उसने जंगल में रहने की सोची।  जब वह जंगल में पहुंचीं तो उस पर गीदड़ की नजर पड़ गई।  बिल्ली को देख कर गीदड़ बड़े ताज्जुब में पड़ गया। मन में सोच ने लगा कि इसकी शक्ल सूरत बिलकुल हमारे शेर से मिलती हे, लेकिन शरीर में बड़ी छोटी है । गीदड़ मन में यह सोचता हुआ सीधा शेर के पास पहुंचा। गीदड़ ने सिर झुकाकर शेर को बिल्ली के बारे में बतलाया और यह भी शंका जाहिर की कि पड़ौसी जंगल का शेर तो रूप बदल कर हमारे जंगल में उत्पात मचाने नहीं आ गया ? शेर को भी यह सुनकर बहुत अचम्भा हुआ। 
;मैं उसे देखना चाहता हूं। ' शेर गीदड़ से बोला। गीदड़ शेर को उसी जगह ले गया, जहाँ उसने बिल्ली को देखा था। शेर भी बिल्ली को देख ताज़्जुब में पड़ गया। शेर  बिल्ली के पास जाकर खड़ा हो गया और बोला ,'कितने आश्चर्य की बात है  तुम्हारी शक्ल तो बिल्कुल मुझ से मिलती जुलती हे ,लेकिन डीलडौल जरा सा है। तुम कौन हो ?'
बिल्ली बड़ी चालाक थी। पहले वो मुस्कराई फिर बोली ,' बेटे तूने मुझे पहचाना नहीं।  मैं तेरी मौसी हूं। आज ही शहर से आई हूं। '
'मौसी ?
'हां बेटे ,बहुत दिन पहले मैं जंगल छोड़ कर शहर चली गई थी। 'लेकिन मौसी तुम्हारा शरीर इतना छोटा कैसे हो गया ?
'तू नहीं समझेगा  बेटे यह सब आदमी का काम है। तू नहीं जानता
 आदमियों के बीच में रहना कितना मुश्किल काम है।
;ऐसी बात है तो  मैं आदमी को देखना चाहता  हूं , वह मुझे कैसे तुम्हारे जैसा बना सकता है।
बिल्ली चालाक तो थी ही ,इसलिए उसने सोचा अब तो शेर को किसी मनुष्य से टकराना पड़ेगा। बिल्ली शेर को अपने साथ एक गांव की तरफ ले चली.वहीं गांव के बाहर एक किसान हुक्का गुड़गुड़ा रहा था. बिल्ली ने दूर से शेर को इशारे से उस किसान को दिखाते हुए कहा ,'वह  है मनुष्य। '
शेर फ़ौरन ही उस किसान के सामने पहुंच गया और दहाड़ा 'तुम मनुष्य हो, मैं तुमसे निपटने आया हूं। 'किसान पहले तो घबराया ,फिर कुछ सोच कर बोला।  'ठीक है मैं भी तैयार हूं ,लेकिन  आज मैं अपनी शक्ति घर पर ही छोड़ आया हूं ,इसलिए अगर मुझे   थोड़ी  देर का समय  दो तो मैं उसे ले आऊं। '
शेर एकदम राजी हो गया। 'लेकिन एक  बात है  तुम पीछे से डर कर भाग गए तो  मेरे आने जाने की मेहनत भी बेकार चली जाएगी। इसलिए एक शर्त पर मैं जा सकता हूं कि तुम्हे पेड़ से बांध कर आऊंगा ताकि तुम मेरे
आने तक भागो नहीं। '
'मुझे मंजूर है। ' शेर ने कहा।
किसान पास से एक मोटी रस्सी ले आया।  उस रस्सी से शेर को कसकर बांध दिया। फिर किसान एक मजबूत डंडा लाया। उससे उसने शेर की खूब मरम्मत की।
शेर जान बचा कर वहां से भाग। थोड़ी दूर पर बिल्ली बैठी यह तमाशा देख रही थी।  जब शेर उसके पास से गुजरा  तो बिल्ली बोली ,' क्यों बेटा  मनुष्य देख लिया। '
'हां ' मौसी।' शेर हाथ जोड़कर बोला ,' यह तुम्हारी ही हिम्मत है जो तुमने मनुष्य के बीच में अपनी जगह बना ली और यह कहकर शेर जंगल में  गायब हो गया।

-विनोद हर्ष

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